डिजिटल अरेस्ट क्या होता है? स्कैम से कैसे बचें — पूरी जानकारी 2026
डिजिटल अरेस्ट क्या होता है? — सीधा जवाब
डिजिटल अरेस्ट भारतीय कानून में कहीं नहीं है। यह एक ठगी है — 100%।
अपराधी पुलिस, CBI, ED या RBI अधिकारी का रूप धारण करके वीडियो कॉल पर आते हैं — नकली वर्दी, AI से बनाए गए पुलिस स्टेशन की पृष्ठभूमि और जाली अदालती दस्तावेजों के साथ — और कहते हैं कि आप “डिजिटल अरेस्ट” में हैं। उद्देश्य एक ही है: डराकर लाखों या करोड़ रुपये ट्रांसफर करवाना।
2026 में यह भारत की सबसे तेज़ी से बढ़ती साइबर ठगी है। I4C के अनुसार, जनवरी 2026 अकेले में ₹3,000 करोड़ से ज़्यादा इस स्कैम में गए।
विषय-सूची (Table of Contents)
- डिजिटल अरेस्ट का अर्थ
- स्कैम कैसे काम करता है — चरण दर चरण
- असली मामले — भारत में कितना नुकसान
- 8 चेतावनी संकेत — यह हमेशा ठगी है अगर…
- क्या डिजिटल अरेस्ट कानूनी है?
- कॉल आने पर 60 सेकंड में क्या करें
- पैसे चले गए? घंटे दर घंटे एक्शन प्लान
- बैंक नोडल ऑफिसर क्यों ज़रूरी है
- सबसे ज़्यादा कौन निशाना बनते हैं
डिजिटल अरेस्ट का अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| डिजिटल अरेस्ट | एक नकली धमकी जिसमें ठग सरकारी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर कहते हैं कि आप किसी अपराध में शामिल हैं और “डिजिटल रूप से गिरफ्तार” हैं |
| कानूनी स्थिति | कोई कानूनी आधार नहीं — IPC, BNS, CrPC या किसी भी भारतीय कानून में मान्य नहीं |
| असली मकसद | मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर पैसे ट्रांसफर करवाना |
| मुख्य शिकार | बुजुर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, गृहिणियाँ, पहली बार स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (मन की बात, अक्टूबर 2024): “कोई भी सरकारी एजेंसी WhatsApp या Skype पर पूछताछ नहीं करती। डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज़ नहीं होती — यह सिर्फ एक धोखा है।“
स्कैम कैसे काम करता है — चरण दर चरण
चरण 1: पहली कॉल (जाल बिछाना)
पीड़ित को कॉल आती है — अक्सर रिकॉर्डेड आवाज़ या अनजान नंबर से:
- “आपके नाम का पार्सल मुंबई कस्टम्स में पकड़ा गया — उसमें ड्रग्स हैं।”
- “आपका आधार नंबर मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा है।”
- “आपके नाम पर 11 SIM कार्ड एक्टिव हैं — DoT जाँच चल रही है।”
- “आपका बैंक खाता संदिग्ध लेनदेन के लिए फ्लैग हुआ है।”
पीड़ित घबरा जाता है — कॉलर कहता है: “मैं आपको वरिष्ठ जाँच अधिकारी से जोड़ता हूँ।“
चरण 2: नकली अधिकारी सामने आता है
स्क्रीन पर आता है — पुलिस की वर्दी में, अशोक स्तंभ के साथ, AI से बनाई गई पुलिस स्टेशन की पृष्ठभूमि के साथ। 2026 में यह इतना असली लगता है कि पहचानना मुश्किल है।
चरण 3: अकेलापन और डर
यही स्कैम की असली शक्ति है:
- “यह राष्ट्रीय सुरक्षा का गोपनीय मामला है — किसी को मत बताना।”
- “अगर परिवार या वकील को बताया तो आप भी आरोपी बन जाएंगे।”
- “24 घंटे कैमरे के सामने रहना होगा — यही डिजिटल अरेस्ट है।”
- “कॉल काटी तो वारंट जारी हो जाएगा।”
पीड़ितों को 14 दिन तक अकेले कैमरे के सामने रखा गया है।
चरण 4: पैसों की माँग
जाली दस्तावेज़ दिखाए जाते हैं:
- सुप्रीम कोर्ट के नकली “सम्पत्ति जब्ती आदेश”
- “सरकारी सत्यापन खाता” विवरण
- नकली FIR प्रतियाँ
माँग की जाती है:
- “₹5 लाख ‘सुरक्षा जमा’ करो — मामला बंद हो जाएगा।”
- “₹2 लाख कोर्ट बेल के लिए ट्रांसफर करो — 48 घंटे में वापस आएंगे।“
असली मामले — भारत में कितना नुकसान
ये सभी मामले 2024–2026 के सत्यापित समाचार स्रोतों से हैं:
| पीड़ित | स्थान | नुकसान |
|---|---|---|
| 92 वर्षीय बुजुर्ग | दिल्ली | ₹2 करोड़ (दिल्ली पुलिस ने वसूले) |
| सेवानिवृत्त डॉक्टर दंपति | दिल्ली | ₹14 करोड़ |
| महिला | मंगलुरु, कर्नाटक | ₹1.80 करोड़ |
| गृहिणी | कर्नाटक | ₹3.16 करोड़ |
| बुजुर्ग महिला | मंगलुरु | ₹3.09 करोड़ |
| प्रोफेसर | इंदौर, MP | ₹33 लाख गए → ₹26.45 लाख वापस मिले |
| पीड़ित (14 दिन कॉल पर रखा) | गोवा | ₹2.6 करोड़ |
कर्नाटक में: 641 मामले, कुल ₹109 करोड़ का नुकसान।
सुप्रीम कोर्ट (फरवरी 2026) ने इन स्कैम्स को “डिजिटल डकैती” कहा और गृह मंत्रालय को विशेष समिति बनाने का निर्देश दिया।
8 चेतावनी संकेत — यह हमेशा ठगी है अगर…
इनमें से कोई भी एक संकेत हो — तुरंत कॉल काटें:
- वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी — भारत का कोई कानून फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की अनुमति नहीं देता
- “गुप्त रखो” की हिदायत — असली पुलिस जाँच में पीड़ित को गुप्त रखने को नहीं कहा जाता
- पैसों की माँग — कोई भी सरकारी जाँच में पहले पैसे नहीं माँगे जाते
- 24 घंटे कैमरे के सामने — यह मनोवैज्ञानिक प्रताड़ना है, कानूनी प्रक्रिया नहीं
- परिवार को न बताने की धमकी — असली पुलिस ऐसा नहीं करती
- “सरकारी सत्यापन खाता” — ऐसा कोई खाता भारतीय कानून में नहीं है
- RBI या सुप्रीम कोर्ट पैसे माँग रहे हैं — RBI ने स्पष्ट किया है कि वह कभी पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती
- AI से बनाई गई पृष्ठभूमि — ठग Zoom या Skype पर असली जैसा दिखने वाला पुलिस स्टेशन बना लेते हैं
क्या डिजिटल अरेस्ट कानूनी है?
नहीं। बिल्कुल नहीं।
IPC, BNS, CrPC या किसी भी भारतीय कानून में “डिजिटल अरेस्ट” का कोई प्रावधान नहीं है।
कोई भी — पुलिस, CBI, ED, आयकर, RBI, TRAI, या सुप्रीम कोर्ट — वीडियो कॉल, WhatsApp, Skype या Zoom पर किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकता।
RBI की आधिकारिक स्थिति: RBI कभी ग्राहकों से पैसे ट्रांसफर करने, OTP शेयर करने या बैंकिंग क्रेडेंशियल देने को नहीं कहती।
NITI Aayog ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट Digital Arrest — The Modern Day Cyber Scam में इसे आधुनिक साइबर ठगी के रूप में वर्गीकृत किया है।
कॉल आने पर 60 सेकंड में क्या करें
कॉल आई → काटें → परिवार को बताएं → वेरीफाई करें → 1930 कॉल करें
कदम 1 — कॉल काटें (अभी)
कोई बहस नहीं। कोई सफाई नहीं। बस कॉल काट दें।
कदम 2 — किसी को तुरंत बताएं
घर के किसी भी सदस्य को तुरंत बताएं। स्कैम की ताकत अकेलेपन में है — उसे तोड़ें।
कदम 3 — स्वतंत्र रूप से वेरीफाई करें
जिस एजेंसी का नाम लिया — उनका नंबर .gov.in वेबसाइट पर खोजें और सीधे कॉल करें। कॉलर का दिया नंबर कभी इस्तेमाल न करें।
कदम 4 — एक रुपया भी न दें
सत्यापन के नाम पर नहीं। जमानत के नाम पर नहीं। किसी भी कारण से नहीं।
पैसे चले गए? घंटे दर घंटे एक्शन प्लान
पहले 2 घंटे — सबसे ज़रूरी
अभी 1930 पर कॉल करें (राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन — 24×7, मुफ़्त)
यह जानकारी तैयार रखें:
- लेनदेन की तारीख, समय और राशि
- UTR नंबर / Transaction ID
- ठग का फोन नंबर
- जिस खाते में पैसे गए (अगर पता हो)
1930 के ऑपरेटर बैंक को तुरंत अलर्ट करते हैं — जल्दी कॉल करने पर मिनटों में ठग का खाता फ्रीज हो सकता है।
अपने बैंक को भी कॉल करें:
- कस्टमर केयर से कहें: “मैं साइबर फ्रॉड का शिकार हुआ हूँ — लेनदेन रोकें।”
- बैंक के नोडल ऑफिसर को ईमेल करें — यह सामान्य कस्टमर केयर से तेज़ काम करता है
👉 अपने बैंक का नोडल ऑफिसर ईमेल यहाँ खोजें →
24 घंटे के अंदर
cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें (गृह मंत्रालय, भारत सरकार):
- “Report Cyber Crime” पर क्लिक करें
- “Financial Fraud” चुनें
- सभी विवरण भरें — क्या हुआ, कब हुआ, लेनदेन विवरण
- स्क्रीनशॉट, बैंक स्टेटमेंट, कॉल रिकॉर्डिंग अपलोड करें
- शिकायत ID सुरक्षित रखें
नज़दीकी साइबर क्राइम सेल में FIR:
- शिकायत ID और लेनदेन प्रमाण साथ ले जाएं
- लिखित शिकायत दें — केवल मौखिक पर निर्भर न रहें
30 दिन बाद (अगर बैंक ने मदद नहीं की)
RBI एकीकृत लोकपाल (भारतीय रिजर्व बैंक):
- ईमेल: crpc@rbi.org.in
- शिकायत ID और बैंक पत्राचार संलग्न करें
बैंक नोडल ऑफिसर क्यों ज़रूरी है
साइबर अपराध होने पर नोडल ऑफिसर बैंक के अंदर सबसे शक्तिशाली संपर्क बिंदु होता है:
- खाता फ्रीज और अनफ्रीज के निर्णय नोडल ऑफिसर स्तर पर होते हैं
- यह सामान्य कस्टमर केयर से ऊपर का एस्केलेशन पॉइंट है
- RBI दिशानिर्देशों के तहत फ्रॉड रिज़ॉल्यूशन नोडल ऑफिसर की ज़िम्मेदारी है
- नोडल ऑफिसर को ईमेल करने के बाद रिस्पॉन्स टाइम काफी तेज़ होता है
NodalOfficer.com पर 150+ बैंकों, पेमेंट प्लेटफॉर्म और टेक कंपनियों के सत्यापित नोडल ऑफिसर संपर्क विवरण उपलब्ध हैं:
👉 SBI नोडल ऑफिसर → 👉 HDFC बैंक नोडल ऑफिसर → 👉 ICICI बैंक नोडल ऑफिसर → 👉 Kotak महिंद्रा बैंक नोडल ऑफिसर → 👉 Axis बैंक नोडल ऑफिसर → 👉 सभी बैंक देखें →
सबसे ज़्यादा कौन निशाना बनते हैं
अपने परिवार में इन्हें ज़रूर बताएं:
- बुजुर्ग (60+) — डिजिटल टूल्स से कम परिचित, सत्ता पर ज़्यादा भरोसा
- सेवानिवृत्त सरकारी / बैंक कर्मचारी — पेंशन खाते मुख्य निशाना
- गृहिणियाँ — दिन में अक्सर घर पर अकेली होती हैं
- पहली बार स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले
- शिक्षित पेशेवर — डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर — जो सोचते हैं “थोड़ा वेरीफाई कर लें” और फँस जाते हैं
त्वरित संदर्भ — याद रखें
| स्थिति | क्या करें |
|---|---|
| ”डिजिटल अरेस्ट” की कॉल आई | तुरंत काटें |
| वीडियो कॉल पर “वर्दी में अधिकारी” | नकली है — काटें |
| ”सरकारी खाते” में पैसे माँगे | बिल्कुल न दें |
| पैसे चले गए — अभी-अभी | 1930 कॉल करें (2 घंटे के अंदर) |
| ऑनलाइन शिकायत | cybercrime.gov.in (24 घंटे में) |
| बैंक ने मदद नहीं की | crpc@rbi.org.in — RBI लोकपाल |
| नोडल ऑफिसर ईमेल चाहिए | NodalOfficer.com |
यह गाइड NodalOfficer.com ने सार्वजनिक साइबर जागरूकता के लिए प्रकाशित की है। स्रोत: गृह मंत्रालय, भारतीय रिज़र्व बैंक, NITI Aayog डिजिटल अरेस्ट रिपोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के आदेश (फरवरी 2026)। यदि आप पीड़ित हैं — 1930 हेल्पलाइन, cybercrime.gov.in और स्थानीय पुलिस से सहायता लें।